हम बिल्कुल साधारण शब्दों में कह देते हैं कि महाभारत का युद्ध 18 दिन तक चला था लेकिन अगर इसी युद्ध को द्रौपदी के नजरिए से देखें तो एक बार विचार कीजिए कि द्रोपदी के लिए वह 18 दिन कितने भारी हुए होंगे , वह 18 दिन द्रोपदी को ऐसे लगे होंगे मानो उनकी पूरी उम्र इसी युद्ध में बीत गई हो ।। महाभारत की समाप्ति के पर्व में लिखा है कि द्रौपदी की आंखें ऐसी हो गई थी मानो किसी गड्ढे में धंस गई हों ।। आंखों के नीचे काले घेरों ने उनके रक्ताभ कपोलों को भी अपनी सीमा में ले लिया था जो कि श्याम वर्ण और अधिक काला हो गया था ।। द्रौपदी को युद्ध से पहले प्रतिशोध की ज्वाला जला रही थी और युद्ध के बाद पश्चाताप की अग्नि भस्म करने पर तुली थी ।। द्रौपदी के दिमाग में ना तो कुछ समझने की क्षमता बची थी और ना ही कुछ सोचने की । कुरुक्षेत्र की रणभूमि में चारों तरफ लाशों की गंध मची हुई थी, जिन के अंतिम संस्कार के लिए ना लोग उपलब्ध थे और ना ही साधन ।। राज्य में विधवाओं का अंबार लगा पड़ा था और पुरुष इक्का-दुक्का ही दिखाई दे रहे थे , बच्चे अनाथ घूम रहे थे और इन सब की महारानी द...